|| क्रोध की भूमि का इतिहास ||
*************
मंगलनाथ उज्जैन से-
जब महाभारत का युद्घ होने वाला था। उस समय पर श्री कृष्ण और अर्जुन युद्घ के लिए भूमि देखने के लिए निकल पड़े, घूमते घूमते वो कुरुक्षेत्र पहुँच गए। वहां उन्होंने देखा एक किसान और साथ में उसका बेटा दोनों खेती कर रहे थे, तभी अचानक एक साँप ने उस किसान के बेटे को डस लिया, उस किसान ने अपने बेटे की लाश को खेत से बाहर कर दिया और फ़िर से खेती करने लगा।
आगे भगवान ने देखा एक महिला खाना ले कर आ रही थी, श्री कृष्ण जी ने उससे पुछा तुम कहा जा रही हो, उसने कहाँ अपने पति और ससुर के लिए खाना ले कर जा रही हूँ।
श्री कृष्ण जी बोले तुम्हारे पति को तो साँप ने डस लिया है और तुम्हारे ससुर ने उसकी लाश को खेत से बाहर कर दिया है। और फ़िर खेती करने लगें हैं। ये सुनते ही वो महिला वही बैठ गई और खाना खाने लग गई, अपने पति के हिस्से का खाना खाकर, वो ससुर का खाना ले कर आगे बढ़ गई।
श्री कृष्ण जी ने अर्जुन से कहा की यही जगह सही हैं युद्घ के लिए, यहाँ किसी को किसी से कोई मतलब नही है, सब अपने बारे में सोचते हैं।
मित्रों अगर आज भगवान श्री कृष्ण को युद्घ के लिए भूमि देखने जाना पड़े, तो आसानी से मिल जायेगी, क्योंकि हर जगह सब अपने बारे में ही सोचते हैं। क्योंकि इस जगत में करूणा का नाश हो गया है।
अपनी पीडा का मूल्य अपनो की पीडा से अधिक है। और अपनो की पीड़ा का मूल्य समाज की पीड़ा से अधिक है। करूणा सूख गई है इस जगत में से। और जब करूणा नही होती समाज मे तो लोग एक दूसरे से बन्धते नही हैं।केवल अपने सुख के लिए जीते हैं। समाज मे जब करूणा का नाश हो जाये तो समाज स्वंय अपने लिए युद्ध निर्मित कर लेता है।
|| नर नारायण की जय हो ||

No comments:
Post a Comment