आज का संदेश
सच मानिये आज आदमी अपने दुःख से कम दुःखी और दूसरों के सुख से ज्यादा दुःखी है। आज आदमी इसलिए दु:खी नहीं कि उसके पास कम है, अपितु इसलिए दु:खी है कि दूसरे के पास अधिक है। हमारे शास्त्रों ने इसे "मत्सर भाव" कहा है। यह मत्सर भी मच्छर की तरह खून चूसता है। मगर दोनों में एक अंतर यह है कि मच्छर दूसरे का खून चूसता है और मत्सर स्वयं का।
किसी की खुशी को देखकर जलना उस मशाल की तरह जलना है, जिसे दूसरों को खाक करने से पहले स्वयं को राख करना पड़ता है। आपके पास जो है वह निसंदेह पर्याप्त है। जो है उसके लिए परमात्मा को धन्यवाद दो। उत्सव मनाने के लिए विशेष अवसर की प्रतीक्षा न करें। उत्सव आपके दुखी चित्त के लक्षण हैं।
जब भी चित्त दुखी होता है, आप उत्सव मना कर खुश हो लेते हैं। वह खुशी आपके ऊपर थोपी हुई होती है। क्योंकि कोई दिन कैसे आपको खुशी दे सकता है ? हां, खुशी का भ्रम अवश्य पैदा कर सकता है। जब तक जीवन में दुख है तभी तक आपको त्योहारों की ज़रूरत है। जिस पल आप आनंदित होंगे, त्योहार जैसी कोई चीज नहीं बचेगी, क्योंकि रोज त्यौहार होगा। हर पल उत्सव होगा।
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