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Saturday, June 29, 2024

त्रीं त्रीं त्रीं हूँ हूँ स्त्रीं स्त्रीं कामाख्ये*

 *त्रीं त्रीं त्रीं हूँ हूँ स्त्रीं स्त्रीं कामाख्ये*

  *प्रसीद स्त्रीं स्त्रीं हूँ हूँ त्रीं त्रीं त्रीं स्वाहा*


*कामाख्ये काम-सम्पन्ने कामेश्वरि ! हर- प्रिये !*

*कामनां देहि मे नित्यं कामेश्वरि ! नमोऽस्तु ते ॥*


*कामदे काम-रूपस्थे सुभगे सुर-सेविते !*

*करोमि दर्शनं देव्याः* *सर्व-कामार्थ-सिद्धये ॥*


*योगेश्वरी-निकेतनम्*


*हे कामाख्ये देवि ! कामना पूर्ण करने वाली, कामना की अधिष्ठात्री,शिवप्रिये ! मुझे सदा शुभकामनाएँ दो और मेरी कामनाओं को सिद्ध करो। हे कामना देनेवाली, कामना के रूप में ही स्थित रहनेवाली, सुन्दरी और देव-गणों से सेविता देवि! सभी कामनाओं की सिद्धि के लिए मैं आपके दर्शन करता हूँ।*


*बताया जाता है कि कामाख्‍या देवी का मंदिर 22 जून से 25 जून तक बंद रहता है। माना जाता है कि इन दिनों में माता सती रजस्‍वला रहती हैं। इन 3 दिनों में पुरुष भी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते। कहते हैं कि इन 3 दिनों में माता के दरबार में सफेद कपड़ा रखा जाता है, जो 3 दिनों में लाल रंग का हो जाता है। इस कपड़े को अम्बुवाची वस्‍त्र कहते हैं। इसे ही प्रसाद के रूप में भक्‍तों को दिया जाता है।*


*तीन बार दर्शन करना जरूरी*

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*मान्‍यता है कि जो लोग इस मंदिर के दर्शन तीन बार कर लेते हैं, तो उन्‍हें सांसारिक भवबंधन से मुक्ति मिल जाती है। यह मंदिर तंत्र विद्या के लिए मशहूर है। इसलिए दूर दूर से साधु संत भी यहां दर्शन के लिए आते हैं।*


*हर साल यहां विशाल मेला लगता है। जिसे अंबुवाची मेला कहते हैं। यह मेला जून में लगता है। यह मेला उसी दौरान लगता है, जब माता मासिक धर्म से होती हैं। इस दौरान मंदिर में जाने की अनुमति किसी को नहीं होती।*


     *||कामाख्या देवी की जय हो ||*




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