आज का संदेश
ऐसी प्रेममयी आत्म भाव से परिपूर्ण परिस्थितियाँ प्राप्त कर सकना हर किसी के लिए नितान्त सरल और सम्भव है। दुनिया में हर चीज की कीमत है यहाँ बिना कीमत चुकाये कुछ भी नहीं मिलता। दूसरों का सम्मान, स्नेह, सद्भाव और सहयोग प्राप्त करने के लिए हमें वही तत्व अपने भीतर पैदा करने पड़ेंगे और उसका उपयोग दूसरों के लिए करना पड़ेगा।
चुम्बक अपने में आकर्षण शक्ति न हो तो पास में पड़े हुए लौह कण भी उपेक्षा का भाव दिखाते रहेंगे, उधर अभिमुख होने की कोई चेष्टा न करेंगे। प्रेम, प्रेम की कीमत पर खरीदा जा सकता है। वह एकाँगी भी हो सकता है। एक का सच्चा प्रेम दूसरे को कभी न कभी अपने अनुगत बना ही लेता है।
बुरे लोगों को भी यदि हम प्यार करने लगें तो उनका सुधार ही होगा। आज नहीं तो कल, हारे जितना न सही उससे कम, कुछ तो प्रेम भाव उनके मन में उपजेगा और बढ़ेगा ही। सच्चे मन से किया हुआ प्रेम कभी भी निरर्थक नहीं जाता। उसके द्वारा पत्थर की मूर्तियाँ और कागज के चित्र देवता बन कर हमें आनन्द से ओत-प्रोत कर सकते हैं तो फिर हाड़-माँस वाला सजीव प्राणी प्रत्युत्तर में सर्वथा प्रेम-विहीन कैसे बना रहेगा ?
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