*🌻प्रातः वंदन🌻*
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*04 जुलाई गुरुवार 2024*
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*छाते की तरह हो गये है रिश्ते*
*ज़रुरत के मुताबिक खोले*
*और बंद किये जाते हैं*
*दिखावे का जीवन जीना*
*बहुत कष्टदायक होता है*
*वास्तविकता कुछ और होती है और*
*वो कुछ और दिखाना चाहता है*
*भ्रम हमेशा रिश्तों को बिखेरता है।*
*प्रेम से अजनबी भी बंध जाते हैं।*
*सुख पाने के लिए इच्छाओं की कतार*
*लगाएं या आशाओं के अम्बार*
*परंतु सुख का ताला केवल*
*संतुष्टि की चाबी से ही खुलता है।*
*|| सुप्रभात वंदन ||*
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