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Sunday, July 7, 2024

*04 जुलाई गुरुवार 2024*

 *🌻प्रातः वंदन🌻*

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*04 जुलाई गुरुवार 2024*

             *👇👇*

*छाते की तरह हो गये है रिश्ते*

*ज़रुरत के मुताबिक खोले*

*और बंद किये जाते हैं*

*दिखावे का जीवन जीना*

*बहुत कष्टदायक होता है*

*वास्तविकता कुछ और होती है और*

*वो कुछ और दिखाना चाहता है*

*भ्रम हमेशा रिश्तों को बिखेरता है।*

*प्रेम से अजनबी भी बंध जाते हैं।*

*सुख पाने के लिए इच्छाओं की कतार*

*लगाएं या आशाओं के अम्बार*

*परंतु सुख का ताला केवल*

*संतुष्टि की चाबी से ही खुलता है।*


     *|| सुप्रभात वंदन  ||*

                🙏🏾🌻🙏🏾




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