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Sunday, July 7, 2024

आज का संदेश

 आज का संदेश 


       हम इस पृथ्वी पर अतिथि बनकर आए हैं, मालिक नहीं, संसार में अधिकांश लोग स्वयं को यहां की संपत्तियों का मालिक समझते हैं, उनके विचार इस प्रकार के होते हैं, यह मकान मेरा है, मैं इसका मालिक हूँ, यह कार मेरी है, यह बैंक बैलेंस मेरा है, यह परिवार मेरा है, यह बेटा मेरा है, यह सम्मान मेरा है, यह विद्या मेरी है, मैं इन सब वस्तुओं का मालिक हूँ, इत्यादि।


         इस मैं और मेरी के चक्कर में बेचारे जीवन भर दुखी रहते हैं इन वस्तुओं की प्राप्ति और सुरक्षा में सारा जीवन तनाव में जीते हैं। यह नहीं कहना चाहता कि इन वस्तुओं का उपयोग और सुरक्षा न करें, यह कहना चाहता हूं कि इन वस्तुओं का उपयोग और सुरक्षा इस प्रकार से करें, जैसे किसी धर्मशाला में कोई अतिथि वहां की वस्तुओं का प्रयोग और सुरक्षा करता है। वह धर्मशाला की वस्तुओं का मालिक स्वयं को नहीं मानता, केवल उपयोगकर्ता के रूप में ही स्वयं को स्वीकार करता है।


              परंतु स्वयं को इन वस्तुओं का मालिक मानने वाले लोग, वास्तव में भ्रांतियों में जी रहे हैं, शायद आप भी ऐसा ही सोचते होंगे। जिन जिन वस्तुओं को आप, मेरा है, या मेरी है, ऐसा मानते हैं, वास्तव में उन सब वस्तुओं में से आपकी कोई भी वस्तु नहींहैं। वस्तु तो आपकी कोई भी नहीं होगी। उन वस्तुओं को प्राप्त करने का थोड़ा सा पुरुषार्थ बस आपका है, इससे अधिक कुछ नहीं।



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