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Sunday, July 7, 2024

|| वेदो को प्रकाश ईश्वर ने किया -||

 || वेदो को प्रकाश ईश्वर ने किया -||

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वेदों के अनेक मंत्रों से मालूम पड़ता है कि वेदों

  का ज्ञान समस्त मनुष्यों के लिए ईश्वर ने दिया।


ओं स्तुता माया वरदा वेदमाता

   प्र चोदयन्तां पावमानी द्विजानम्।


आयु: प्राणं पशुं कीर्ति द्रविण ब्रह्मवर्चसम्।

      मह्मं दत्त्वा व्रजत ब्रह्मलोकम् ।


ईश्वर उपदेश देता है कि हे मनुष्यो ! इष्टफल देने वाली , ज्ञानमयी वेदवाणी मेरे द्वारा प्रकाशित की गई है।हे विद्वान लोगो ! यह वेदवाणी द्विजों को पवित्र करने वाली है आयु, प्राण , सुप्रजा , गौ आदि पशु, कीर्ति, धन और तेज वाली है, इसको द्विजों में आगे प्रचारित करो। इसके द्वारा प्राप्त किये गये शुभ कर्मों को मेरे अर्पण करके तुम ब्रह्मलोक को प्राप्त करो।


यस्माहचो अपातक्षन् यजुर्यस्मादपाकषन्।

सामानि यस्य लोमन्यथर्वाड्गरसो

   मुखै स्कम्भं तं ब्रहि कतम: स्विदेव स: ।।


अथर्वेद का० 10 प्रपा० 23 अनु० 4 मं.20


जिस परमात्मा से ऋगवेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद प्रकाशित हुए है,वह कौन सा देव है ? जो सब को धारण कर रहा है वह परमात्मा है।


स्वयम्भूयार्थातथ्यतोऽर्थान् 

 व्यदधाच्छाश्र्वतीम् : समाभ्य:


  (यजुर्वेद अ० 40।मं. 8)


जो  स्वयंभू सर्वव्यापक शुद्ध सनातन निराकार परमेश्वर है वह सनातन जीवरूप प्रजा के कल्याणार्थ यथावत् रीति पूर्वक वेद द्वारा सब विद्याओं का उपदेश करता है।


अग्नेर्वा ऋग्वेदो जायते वायोर्यजुर्वेद

       सुर्यत्सामवेद: शत० तुलना ।

             (11/4।2/3)


सृष्टि के आदि में प्रमातमा ने अग्नि वायु आदित्य तथा अंगिरा इन ऋषियों के आत्मा में एक एक वेद का प्रकाश किया।


अग्निवायुरविभ्यस्तु त्रयं ब्रह्म सनातनम् ।

दुदोह यज्ञसिद्ध्यर्थमृग्यजु:सामलक्षणम्।

              (मनु.1/23/)


जिस परमात्मा ने आदि सृष्टि में मनुष्यो को उत्पन्न करके अग्नि आदि चारो महार्षियों के द्वारा चारो वेद ब्रह्मा को प्राप्त कराये और उस ब्रह्मा ने अग्नि वायु आदित्य और अंगिरा से ऋग यजु साम और अथर्ववेद का ग्रहण किया।


यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः।

ब्रह्मराजन्याभ्या शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय ।।

          (यजुर्वेद 26.2)


भावार्थ- परमेश्वर स्वयं कहता है कि मैने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, अपने भृत्य वा स्त्रियादि के लिये भी वेदों का प्रकाश किया है; अर्थात् सब मनुष्य वेदों को पढ़ - पढ़ा और सुन - सुना कर विज्ञान को बढ़ा के अच्छी बातों का ग्रहण और बुरी बातों का त्याग करके दुःखों से छूट कर आनन्द को प्राप्त हों।


   || वेद भगवान की जय हो ||




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