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Sunday, July 7, 2024

श्रीराम जी संदेश देते हैं

 श्रीराम जी संदेश देते हैं 

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 सबका मान करो, साथ लेकर चलो।

     उज्जैन से-

जो हमारे पक्ष में नहीं है, वह हमारा विरोधी है।ऐसा रावण कहा करता था। राम बिल्कुल इसके उल्टे थे। उनका कहना था, यदि आपका किसी ने विरोध किया है, तो आप उसको शत्रु मत मानो। यदि वो आपके विपक्ष में है, तो निंदा में सलाह ढूंढो और और सलाह में हित तलाशो। आज प्रतिस्पर्धा के युग में अधिकांश लोगों की मानसिकता ऐसी हो गई है कि यदि कोई आपके पक्ष में नहीं है, तो आप उसको अपना विरोधी और शत्रु मान लेंगे। विपक्ष का सम्मान किया जाना चाहिए। अगर आप नहीं करेंगे, तो ऊपर वाला अपने ढंग से करवा लेता है।विभीषण जब पहली बार श्रीराम से मिलने आए, रावण उनको लंका से निकाल चुका था।


तो विभीषण विपक्ष वाले थे। सुग्रीव और अन्य लोगों ने राम को राय दी कि इसको बंदी बना लें, क्योंकि ये विपक्ष का है। लेकिन हनुमान का मानना था कि ये हमारे विपक्ष में है, तो क्या जरूरी है कि ये हमारा शत्रु ही हों और हम इनका विरोध करें। और अगर वो विरोधी भी हैं, तो हमें उनका स्वागत करना चाहिए। राम इसी सिद्धांत के थे। और श्रीराम ने विभीषण को सम्मान दिया ।और विभीषण की सलाह उनके काम आईं। लोकतंत्र के लिए श्रीराम ने ये बड़ा संदेश दिया था कि सबका मान करो, सबको साथ लेकर चलो। निजी जिद लोकतंत्र के लिए धीमा जहर है। विश्व विजेता रावण वनवासी राम से इसी करण हार गया था।


           जय श्री राम जय हनुमान 




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