Followers

Saturday, July 6, 2024

शनि और भगवान शिव........

 शनि और भगवान शिव.............


क्यों शिव जी ने शनिदेव को पीपल के पेड़ पर 19 सालों तक लटकाये रखा था ?


      शनिदेव ग्रह और देवता दोनों रूप में पूजे जाते है। शनिवार के दिन शनि देव का पूजन किया जाता है। शनिदेव व्यक्ति को उनके अच्छे और बुरे कर्मों के फल प्रदान करते है। इसी कारण इन्हें कर्म दंडाधिकारी का पद प्राप्त है। यह पद उन्हें भगवान शंकर से प्राप्त है। ऐसे में यदि शनिदेव रूठ जाये तो बड़े नुकसान होता है। और इनके रूठ जाने से व्यक्ति के जीवन में बुरे प्रभाव पड़ते है लेकिन अगर शनिदेव प्रसन्न हो जाये तो सारी बला टल जाती है। मूलतः शनि कर्म प्रधान ग्रह है जिसका पुराणों ने साकार दार्शनिक चित्रण किया है। 


          शास्त्र के अनुसार, शनिदेव के अधिदेवता ब्रह्मा व प्रत्यधिदेवता यम हैं। कृष्ण वर्ण शनिदेव का वाहन गिद्ध है और ये लोह रथ की सवारी करते है। शनिदेव के दृष्टि के प्रभाव से इनके पिता सूर्यदेव को कुष्ट रोग हो गया था। 


        कहा जाता है कि जिस भी व्यक्ति पर इनकी कुदृष्टि पड़ जाता है तो वो राजा से रंक बन जाता है। इंसान ही नहीं बल्कि देवी- देवता भी इनके प्रकोप से डरते है। 


        वैसे यदि आप शनिदेव के भक्त है तो क्या आपकी पता है कि भगवान शिव ने शनिदेव को पीपल के पेड़ पर १९ सालों तक लटकाए रखा था। जी हाँ, सुनकर आपको यकीन तो नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सच है और आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा।


          एक पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यदेव ने अपने पुत्रों को उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें विभिन्न लोकों का अधिपत्य प्रदान किया था। परन्तु असंतुष्ट शनिदेव ने उद्दंडता वश पिता की आज्ञा की अवेलना करते हुए दूसरे लोकों पर भी कब्जा कर लिया। ऐसे में सूर्यदेव के निवेदन करने पर भगवान शंकर ने अपने गणों को शनिदेव से युद्ध करने भेजा परंतु शनिदेव ने उन सभी गणों परास्त कर दिया। उसके बाद विवश होकर शिव जी को ही शनिदेव से युद्ध करना पड़ा और उन दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। 


         कहा जाता है कि इस भयंकर युद्ध में शनिदेव ने भगवान शंकर पर मारक दॄष्टि डाली तब महादेव ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर शनि तथा उनके सभी लोकों को नष्ट कर दिया और केवल यही नहीं बल्कि भगवान भोलेनाथ ने अपने त्रिशूल के अचूक प्रहार से शनिदेव को संज्ञाशून्य कर दिया। 


        इसके बाद शनिदेव को सबक सिखाने के लिए भगवान शंकर ने उन्हें 19 वर्षों के लिए पीपल के वृक्ष से उल्टा लटका दिया। कहते है इन वर्षों में  भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन रहे। इसी कारण शनि की महादश 19 वर्ष की होती है। 


       परंतु पुत्रमोह से ग्रस्त सूर्य ने महादेव से शनि का जीवदान मांगा। उसके बाद भगवान भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर ना केवल शनिदेव को मुक्त कर दिया बल्कि अपना शिष्य बनाकर उन्हें संसार का दंडाधिकारी भी नियुक्त कर दिया।।


जय जय श्री राधे!!




No comments:

Post a Comment